यूपीआई से लेकर अंतरिक्ष तक, भारत-इंडोनेशिया ने बढ़ाया रणनीतिक सहयोग

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा कि भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में नई ऊर्जा, नया विश्वास और नई गहराई आई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब नई उड़ान भर रही है और दोनों देश विकास, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति तथा शिक्षा सहित सभी क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आज से दोनों देशों की साझेदारी का एक नया स्वर्णिम अध्याय शुरू होगा, जिसका सकारात्मक प्रभाव पूरी दुनिया और मानवता पर पड़ेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान प्रदान किए जाने पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, वहां की सरकार और जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों, भारत-इंडोनेशिया की ऐतिहासिक मित्रता और दोनों देशों के लोगों के स्नेह का सम्मान है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता विश्वास रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत कर रहा है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। साथ ही दोनों देशों के कोस्ट गार्ड हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा के लिए मिलकर काम करेंगे। ब्लू इकोनॉमी, बंदरगाह विकास और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया दोनों के लिए गरीबी उन्मूलन और नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि भारत ने इंडोनेशिया के साथ मिड-डे मील योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अनुभव साझा किए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए समझौते से इंडोनेशिया के लोगों को भारत की उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती दवाएं आसानी से मिल सकेंगी। भारत वहां डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के क्षमता निर्माण में भी सहयोग करेगा। इसके अलावा भारत में विकसित गेहूं के बीजों की आपूर्ति तथा टिकाऊ खेती और कृषि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी तकनीक आधारित सदी है और दोनों देशों के युवा तकनीक के प्रति स्वाभाविक रूप से आकर्षित हैं। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), दूरसंचार और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। दोनों देश स्टार्टअप सहयोग को भी और गहरा करेंगे। उन्होंने घोषणा की कि इंडोनेशिया में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बेंगलुरु का परिसर खोला जाएगा, जिससे पूरे आसियान क्षेत्र के युवाओं को लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में दशकों पुराना सहयोग रहा है। अब दोनों देशों ने संयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी साझा करने और क्षमता निर्माण को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा क्रिटिकल मिनरल्स, स्टील सप्लाई चेन, स्टेनलेस स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट के क्षेत्र में भी नए समझौते किए गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की यूपीआई सेवा जल्द ही इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली से जुड़ जाएगी, जिससे कारोबार और यात्रा दोनों आसान होंगे। उन्होंने बताया कि दोनों नेता योग्याकार्ता स्थित एक हजार वर्ष पुराने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण परियोजना की शुरुआत करेंगे। इसके साथ ही गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दोनों देश ‘टैगोर और देवान्तरा वर्ष : सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कूटनीति’ के रूप में विशेष आयोजन करेंगे।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्य और विविधता में एकता भारत और इंडोनेशिया की साझा ताकत हैं। दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से लोकतांत्रिक सहयोग और मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर दोनों देशों की सोच समान है और भारत हमेशा आसियान की केंद्रीय भूमिका का समर्थन करता है। फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत ने दो-राष्ट्र समाधान और दीर्घकालिक शांति के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के सामने एक स्वर्णिम अवसर है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का साझा इतिहास, साझा विश्वास और साझा समृद्धि का भविष्य उन्हें और करीब लाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देश मिलकर ‘इंडोनेशिया एमास’ और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करेंगे।