अमित शाह ने आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ की उच्चस्तरीय बैठक

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में देश में संभावित बाढ़ और हीटवेव से निपटने की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की। बैठक में विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में “जीरो कैजुअल्टी डिजास्टर मैनेजमेंट” के विजन को लागू करने की दिशा में काम करना होगा। उन्होंने कहा कि देश के हर राज्य में फ्लड क्राइसिस मैनेजमेंट टीम (FCMT) का गठन और सक्रिय संचालन सुनिश्चित किया जाए।
अमित शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के उच्च जोखिम वाले झील क्षेत्रों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित की जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि कम से कम 60 झीलों को इस योजना में शामिल किया जाए और केंद्र व राज्य स्तर पर बाढ़ पूर्वानुमान के लिए एकीकृत प्रणाली विकसित की जाए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की ओर से जारी दिशा-निर्देशों की राज्य, जिला और नगर स्तर पर समीक्षा की जानी चाहिए ताकि इनके बेहतर क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही एनडीएमए को यह अध्ययन करने के निर्देश दिए गए कि कितने राज्य वनाग्नि, हीटवेव और बाढ़ से निपटने के लिए गृह मंत्रालय तथा एनडीएमए के दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधारने के लिए चेक डैम और जल भंडारण परियोजनाओं की संभावनाओं को बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नदियों पर चेक डैम बनाकर जल संरक्षण के साथ-साथ हीटवेव के प्रभाव को भी कम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए CAMPA फंड का बहुआयामी उपयोग किया जाना चाहिए।
अमित शाह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में आ रहे बदलावों और उनसे जुड़ी आपदाओं से निपटने के लिए “Whole of Government” और “Whole of Society” दृष्टिकोण के तहत मास्टर प्लान तैयार किया जाए।
गृह मंत्री ने कहा कि नई ऐप और पोर्टल बनाने की बजाय मौजूदा प्लेटफॉर्म को और बेहतर और प्रभावी बनाया जाए। साथ ही मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियों का व्यापक और प्रभावी प्रसार सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
गृह मंत्री ने कहा कि मानसून के दौरान होने वाली मौतों, पूर्वानुमानों की सटीकता और कृषि क्षेत्र को होने वाले नुकसान का अध्ययन कर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को और मजबूत किया जाना चाहिए।
उन्होंने मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि मौसम से जुड़ी योजनाएं जमीनी स्तर तक पहुंचें।
बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल केंद्रीय गृह सचिव, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, भारत मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और केंद्रीय जल आयोग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।