दलहन-तिलहन और प्राकृतिक खेती से बदलेगा खेती का भविष्य: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह

नई दिल्ली। लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कृषि क्षेत्र से जुड़े कई अहम फैसलों, योजनाओं और नीतिगत दिशा पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस दलहन-तिलहन उत्पादन, कृषि विविधीकरण और छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर है।
शिवराज सिंह ने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दलहन और तिलहन उत्पादन को बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही कृषि विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि किसान केवल एक फसल पर निर्भर न रहें। उन्होंने बताया कि छोटे किसानों की आय बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक खेती मॉडल, बेहतर बीज, और बाजार से जुड़ी नीतियों पर तेजी से काम किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड, फार्मर आईडी और डिजिटल कृषि व्यवस्थाएं किसानों को एक नई दिशा दे रही हैं। इन तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों से किसानों को समय पर ऋण, सब्सिडी और योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि जब तक प्रयोगशाला का ज्ञान खेत तक नहीं पहुंचेगा, तब तक कृषि अनुसंधान का वास्तविक लाभ किसानों को नहीं मिल पाएगा।
उत्तर प्रदेश के संदर्भ में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ हर परिस्थिति में खड़ी है। उन्होंने बताया कि आलू के दाम गिरने पर किसानों को राहत देने के लिए एमआईएस योजना के तहत 20 लाख मीट्रिक टन आलू की खरीद की अनुमति दी गई है।
साथ ही उत्तर प्रदेश में आलू उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण को मजबूत करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य और रोजगार के अवसर मिलेंगे।
शिवराज सिंह ने बताया कि देशभर में 9 क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य किसानों को रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इससे बागवानी क्षेत्र को नई गति मिलेगी और किसानों की आय में भी सुधार होगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतें बढ़ने के बावजूद किसानों पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि हाल की कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 41,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है, ताकि किसानों को यूरिया 266 रुपए प्रति बोरी और डीएपी 1,350 रुपए प्रति बोरी की दर पर उपलब्ध कराया जा सके।
शिवराज चौहान ने नकली बीज, नकली कीटनाशक और मिलावटी कृषि उत्पादों को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह केवल फसल का मुद्दा नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि सरकार सीड एक्ट और पेस्टिसाइड एक्ट में सख्त संशोधन करने जा रही है, ताकि दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है, क्योंकि रासायनिक उर्वरकों का असंतुलित उपयोग मिट्टी और स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को संक्रमण काल में प्रति हेक्टेयर आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि वे इस बदलाव को आसानी से अपना सकें।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग कृषि रणनीतियां तैयार की जा रही हैं, ताकि फलों, सब्जियों और अन्य उत्पादों को बेहतर बाजार और निर्यात अवसर मिल सके। उत्तर भारत के लिए भी समन्वित कृषि और निर्यात रणनीति पर काम जारी है।
लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को सरकार ने बेहद महत्वपूर्ण माना है। इससे मिले सुझाव आगामी खरीफ और रबी सीजन की नीतियों, कृषि आय, तकनीकी हस्तांतरण, फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती की दिशा तय करेंगे।