प्रधानमंत्री बनेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ? पहली बार दिया खुलकर जवाब, कहा- राजनीति मेरे लिए...


लखनऊ। " उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर सियासी हलकों में दावा किया जा रहा है कि वह कभी न कभी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे. अब इससे जुड़े एक सवाल का सीएम योगी ने बड़ा जवाब दिया है. सीएम ने कहा है कि मैं तो योगी हूं. राजनीति मेरे लिए फुल टाइम जॉब नहीं है. मैं अभी उत्तर प्रदेश राज्य का सीएम हूं.

समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में सीएम ने कहा कि 'देखिए, मैं राज्य का मुख्यमंत्री हूं, पार्टी ने मुझे उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए यहां रखा है और राजनीति मेरे लिए पूर्णकालिक काम नहीं है. फिलहाल हम यहां काम कर रहे हैं लेकिन असल में मैं एक योगी हूं. जब तक हम यहां हैं, हम काम कर रहे हैं. इसकी भी एक समय सीमा होगी.' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाने के फैसले को सही बताया और कहा कि लोगों को महाकुंभ के दौरान प्रयागराज आए श्रद्धालुओं से अनुशासन सीखना चाहिए. सीएम ने कह कि 'सड़कें चलने के लिए हैं और जो ऐसा कह रहे हैं कि सड़क पर नमाज पढना है तो उन्हें हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए. प्रयागराज में 66 करोड़ लोग आए. कहीं लूटपाट ,आगजनी ,छेड़छाड़ तोड़फोड़ नहीं हुई. अपहरण नहीं हुआ. यही धार्मिक अनुशासन है. वह श्रद्धा से आए, महास्नान में शामिल हुए और फिर अपने गंतव्य की ओर बढ़ गए. त्योहार और उत्सव या ऐसे कोई भी आयोजन बदतमीजी का माध्यम नहीं बनने चाहिए. अगर सुविधा चाहिए तो उस अनुशासन का पालन करना भी सीखिए.'

बुलडोजर पर भी बोले सीएम

यह पूछे जाने पर कि क्या वह 'बुलडोजर मॉडल' को अपनी उपलब्धियों में से एक मानते हैं, यूपी के सीएम योगी ने कहा- यह कोई उपलब्धि नहीं है. उत्तर प्रदेश की जरूरत थी और उसके संबंध में जो भी जरूरी लगा, वो किया. अगर कहीं कोई अतिक्रमण है, तो हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल होता है.मुझे लगता है कि हमने लोगों को इसका बेहतर तरीके से उपयोग करना सिखाया है।"

राजनीति और धर्म का मिलन गलत नहीं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजनीति में धर्म का मिलन गलत नहीं है। ये हमारी गलती है कि हम धर्म को कुछ स्थानों के लिए सीमित कर देते हैं और राजनीति को कुछ लोगों के लिए छोड़ देते हैं। इससे समस्याएं उत्पन्न होती हैं। राजनीति का उद्देश्य स्वार्थों की पूर्ति करना नहीं है बल्कि समाज की भलाई करना  है। इसी तरह धर्म का उद्देश्य भी परमार्थ होता है। जब धर्म का प्रयोग स्वार्थ की पूर्ति के लिए होता है तो मुश्किल आती है लेकिन परमार्थ का उद्देश्य होने पर धर्म प्रगति के मार्ग खोलता है।

क्या केंद्रीय नेताओं के साथ आपके मतभेद हैं?

मतभेद होने की बात कहां से आ जाती है। पार्टी के कारण ही मैं यहां बैठा हूं। केंद्रीय नेताओं के साथ मतभेद करके क्या मैं यहां बैठा रह सकता हूं? टिकट का वितरण पॉर्लियामेंट्री बोर्ड करता है। पॉर्लियामेंट्री बोर्ड में सबके विषय में चर्चा होती है। स्क्रीनिंग के माध्यम से वहां सबके बारे में बातें पहुंचती हैं।

वक्फ बिल किसी प्रकार का विरोध पैदा कर सकता है?

जो इस मुद्दे पर हंगामा कर रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या वक्फ बोर्ड ने कोई कल्याण किया है? सब कुछ छोड़िए, क्या वक्फ ने मुसलमानों का भी कोई कल्याण किया? वक्फ निजी स्वार्थ का केंद्र बन गया है।

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