गरियाबंद। राजिम कुंभ कल्प में नगरी सिहावा से आए हेमंत गिरी गोस्वामी ने बताया कि राजिम एक पवित्र धाम है, जहां शिवजी की कृपा भक्तों पर बरसती हैं। उन्होंने बताया कि परमात्मा का नाम ही शिव हैं, जो सभी का कल्याण करते हैं। शिव सृष्टि के उत्पत्ति, स्थिति और संहार के अधिपति हैं। शिव काल, महाकाल ही ज्योतिष शास्त्र के आधार हैं। समस्त ब्रह्मांड है और पूरी सृष्टि में शिव विद्यमान है। स्वयं भू शाश्वत सर्वाेच्च सत्ता है और विश्व चेतना हैं।
शिवजी की सौम्य आकृति एवं रौद्र रूप विश्व में विख्यात हैं। शिव हिन्दू धर्म में सबसे प्राचीन और लोकप्रिय देवता है। शिव ही वो गर्भ हैं जिसमें सब कुछ जन्म लेते हैं और वे ही वो गुमनामी हैं जिनमें सब कुछ फिर से समा जाता हैं। सब कुछ शिव से आता हैं और शिव में ही मिल जाता हैं। शिव और रुद्राक्ष का संबंध बताते हुए कहा की रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई हैं। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने अपने मन को वश में कर दुनिया के कल्याण के लिए सैकड़ों साल तक तप किया। एक दिन अचानक ही उनका मन दुखी हो गया। तब उन्होंने अपनी आंखे खोली तो उनकी आंसूओ की बूंदें गिर गई। इन्ही आंसू की बूंदों से रुद्राक्ष नामक वृक्ष उत्पन्न हुआ। भगवान शिव हमेशा ही अपने भक्तों पर कृपा करते हैं। उनकी लीला से ही आंसू आकार लेकर स्थिर अर्थात् जड़ हो गया। जनसाधारण के अनुसार अगर भगवान शिव और माता पार्वती को खुश करना हैं तो रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
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