बड़े जूता कारोबारी, छोटे व्यापारियों को रकम के बदले पर्ची देते हैं। जिन्हें कारोबारी जरूरत के मुताबिक भुना लेते हैं। इससे एक तरफ व्यापार में नकदी दिखाई नहीं देती। दूसरी तरफ बड़े पैमाने पर टैक्स में हेराफेरी होती है।
पर्चियों का यह खेल 100 से अधिक बड़े जूता व्यापारियों की साख पर चल रहा है। हींग की मंडी से लेकर गली-मुहल्लों तक फैला यह कारोबार एक तरह से उधार और वायदा कारोबार है। हरमिलाप ट्रेडर्स के रामनाथ डंग को पर्ची कारोबार का किंग माना जाता है। जूता कारोबारियों के मुताबिक पर्ची को भुनाने के बदले 50 पैसा प्रति सैंकड़ा से तीन प्रतिशत तक का ब्याज लिया जाता है।
आयकर विभाग की अन्वेषण शाखा को रामनाथ डंग के घर से बड़े पैमाने पर पर्चियां मिली हैं। सूत्रों का कहना है कि पर्चियों में 20 से अधिक जूता कारोबारियों के नाम हैं। ऐसे में आयकर विभाग की जांच का दायरा भी बढ़ सकता है। रामनाथ डंग के घर से जब्त की गई राशि को लेकर रविवार को शहर के जूता कारोबारियों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। आयकर विभाग को मिले साक्ष्यों से पर्ची भुनाने वाले कारोबारियों की गर्दन भी फंस सकती है। आयकर के छापे के बाद कोई भी जूता कारोबारी कुछ भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं हो रहा।
छापे में मिली पर्चियों से बढ़ी मुश्किल: रामनाथ डंग के घर, फैक्टरी व प्रतिष्ठान से बरामद पर्चियों से शहर के जूता कारोबारियों की मुश्किल बढ़ गई है। आयकर टीम इन पर्चियों को आधार बनाकर उन कारोबारियों के ठिकानों तक पहुंच सकती है। हींग की मंडी में जूता के अलावा शू मैटेरियल से जुड़े कारोबारी भी पर्चियों से लेनदेन करते हैं। हरमिलाप ट्रेडर्स का शू मैटेरियल कारोबार बड़ा कारोबार है।
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